Monday, April 25, 2011


तिनको ने आज नीड़ का एलान कर दिया,
हर ज़ुल्म की इबारत तोड़ देंगे हम,
हाथ उठेगा तो उसको मोड़ देंगे हम,
लो धडकनों को भी हमने तूफ़ान कर दिया,
तिनकों ने आज नीड़ का एलान कर दिया।





गुँथ
गया है रस्सियों में रस्सियों का बल,
सोचना ही बस नहीं है, मुश्किलों का हल,
खुद से ही नए हौसलों को बयान कर लिया,
तिनकों ने आज नीड़ का एलान कर दिया।

किनारों को अक्सर लहरें तोड़ देती है,
ज़िन्दगी को ज़िन्दगी ही निचोड़ देती है,
मजबूरियों का हमने क़त्ल-ऐ-आम कर दिया,
तिनकों ने आज नीड़ का एलान कर दिया।

Tuesday, March 8, 2011

ज़िन्दगी के ये चार आने,
चल रहे हैं किसी बहाने,
ढेर सारी उल्झंनो में
सुलझे सुलझे हैं फिक्राने,
ज़िन्दगी के ये चार आने,
जी के देखो किसी बहाने,

बेपरवाह सी है आरज़ू,
बेपरवाह लम्हों की कतार भी,
जानकार जीने की लत पाली,
इतना लम्बा इंतज़ार भी,
कोशिशों को ठोकर लगी जब
लोग आये आज़माने।
ज़िन्दगी के ये चार आने,
दे गए गुज़रे ज़माने।
ढेर सारी उलझनों के बीच,
सुलझे सुलझे हैं फिक्राने


आज फिर से होने लगा है,
बासी दिन से मुझको प्यार,
धुप लेटी थी छत के ऊपर,
सहमी खड़ी थी घर की दीवार।
जाने हवा ने कब करवट बदली,
बिछने लगे सारे शामियाने।
ज़िन्दगी के ये चार आने,
आयें हैं हमको फुसलाने,
ढेर सारी उलझनों के बीच,
सुलझे सुलझे हैं फिक्राने।