
बस कुछ पल के अफ़साने हैं,
उस रोज़ नए चेहरे थे यहाँ,
जीने की एक उम्मीद बंधी थी,
जिस पल को तुम ठहरे थे यहाँ।
खामोश थे लब, अन्जान थे सब,
हैरत में पड़ी थी रातें,
एक सुर्ख नज़र थी फैली हुई,
कई राज़ इनमे गहरे थे यहाँ।
जीने की उम्मीद बंधी थी,
जिस पल को तुम ठहरे थे यहाँ!
मशहूर थी रात, खामोश थी बात,
सहमी सी पड़ी थी यादें,
गुन्ज़ायिश थी बस सपनो की,
जब लम्हे सुनहरे थे यहाँ,
जीने की उम्मीद बंधी थी,
जिस पल को तुम ठहरे थे यहाँ!
साजिश की लहर थी चरों पहर,
कैदी थे पुराने ज़ख्म यहाँ
ख्वाहिश के परिंदे उड़ न पाए,
हर मोड़ पे कई पहरे थे यहाँ,
जीने की एक उम्मीद बंधी थी,
जिस पल को तुम ठहरे थे यहाँ। ।
part-2
होश के संग नया जोश भी है,
अब रंगों में उडी है खुशबू,
कोशिश की फ़िराक में भीगी हुई,
अजनबी सी लहरें हैं यहाँ,
तब कुछ पल के अफ़साने थे,
अब रोज़ नए चेहरें हैं यहाँ,
फिर से नयी एक राह सजेगी,
जिसके लिए हम ठहरे हैं यहाँ। ।
