Monday, April 25, 2011


तिनको ने आज नीड़ का एलान कर दिया,
हर ज़ुल्म की इबारत तोड़ देंगे हम,
हाथ उठेगा तो उसको मोड़ देंगे हम,
लो धडकनों को भी हमने तूफ़ान कर दिया,
तिनकों ने आज नीड़ का एलान कर दिया।





गुँथ
गया है रस्सियों में रस्सियों का बल,
सोचना ही बस नहीं है, मुश्किलों का हल,
खुद से ही नए हौसलों को बयान कर लिया,
तिनकों ने आज नीड़ का एलान कर दिया।

किनारों को अक्सर लहरें तोड़ देती है,
ज़िन्दगी को ज़िन्दगी ही निचोड़ देती है,
मजबूरियों का हमने क़त्ल-ऐ-आम कर दिया,
तिनकों ने आज नीड़ का एलान कर दिया।

1 comment:

Lost some where in d!s world said...

Hey! Shekhar, Hope you doing well.. Keep updating your blog. M sure its gonna be better with time :)