अक्शैनी
बनके मेरी आँखों का नूर,
लेके आई खुशियाँ भरपूर,
मांगते हाथों पे मेरे रख दी कलियाँ,
दुआ कर ली खुदा ने मंज़ूर!
जाने कहाँ सीखा मुस्कुराना,
अधखुली आँखों से खिलखिलाना,
ख्वाहिशें तो थी आसमान से परे,
चाँद का फिर भी मिल गया खज़ाना!
अब नहीं है तम्मना और कोई,
हाँ लड्डू मिल गया मुझे मोतीचूर!
मांगते हाथों पे मेरे रख दी कलियाँ,
दुआ कर ली खुदा ने मंज़ूर!
गोद में जब मेरी वो झूले,
मेरी खुशियाँ बुलंदियों को छूले,
ज़िन्दगी में उमंग है आई,
मन मेरा प्रसन्नित हो के फूले!
बस इतनी सी बात है सच मान लो
मेरी पारी है मेरा गुरूर,
मांगते हाथों पे मेरे रख दी कलियाँ,
दुआ कर ली खुदा ने मंज़ूर!
बनके मेरी आँखों का नूर,
लेके आई खुशियाँ भरपूर,
मांगते हाथों पे मेरे रख दी कलियाँ,
दुआ कर ली खुदा ने मंज़ूर!
जाने कहाँ सीखा मुस्कुराना,
अधखुली आँखों से खिलखिलाना,
ख्वाहिशें तो थी आसमान से परे,
चाँद का फिर भी मिल गया खज़ाना!
अब नहीं है तम्मना और कोई,
हाँ लड्डू मिल गया मुझे मोतीचूर!
मांगते हाथों पे मेरे रख दी कलियाँ,
दुआ कर ली खुदा ने मंज़ूर!
गोद में जब मेरी वो झूले,
मेरी खुशियाँ बुलंदियों को छूले,
ज़िन्दगी में उमंग है आई,
मन मेरा प्रसन्नित हो के फूले!
बस इतनी सी बात है सच मान लो
मेरी पारी है मेरा गुरूर,
मांगते हाथों पे मेरे रख दी कलियाँ,
दुआ कर ली खुदा ने मंज़ूर!




