सड़क के दो हिस्से और दोनों ही खाली,
दो हिस्सों के बीच streetlight की रोशनी साली,
रुक कर मेरे पास तन्हाई ने मांगी,
समय की मीठी बर्फी १० रुपए वाली!!
मैंने सोचा......
३ रुपए के समय का ऑफिस में खर्चा हुआ,
Ideas की बोली लगी, और layouts पे चर्चा हुआ,
दिमाग को पूरा चाट गए client servicing वाले
फिर Boss का power ब्रेक हुआ चलो अछा हुआ!!
और……..
४ रुपए का समय दोस्त के घर जाकर पिया,
उसने गिले शिकवो का neat peg दिया,
होश, पर् लगा कर हवा में उड़ने लगे
जब बूंदों को हमने ग्लास में लिया,
यह……..
२ रुपए का समय तो मै कहीं दे आया था,
कुछ मीठे अल्फाज़ और कुछ हंसी लाया था,
कागज़ पर उन अल्फाजो को क़ैद कर लिया,
और हंसी को बाँध कर मांजे से उडाया था!!
लेकिन……….
अब बचा है केवल १ रुपए का समय,
तन्हाई को दूं, या अपने घर वालों को,
समय! मैं अब तक दोनों को ही नहीं दे पाया,
फिजूल में इधर उधर अपना समय गंवाया!!
फिर सोचा….
१ रुपए की समय की बर्फी घर ले जाऊँ,
थोड़ी थोड़ी सबके हिस्से से मैं खाऊं?
तन्हाई को भी एक निवाला दे दू
रोज़ अगर मैं समय से अपने घर जाऊँ?