जब जीना आसान नहीं था, तब जीने की कोशिश की,
ख़्वाबों को सिरहाने रखकर, सो जाने की कोशिश की,
पहले वक़्त की चाबुक से इस दर्द को इतना पीटा,
फिर उलझे अश्कों को हमने सुलझाने की कोशिश की,
नीम के पत्ती जैसे, अलफ़ाज़ किसी के तीखे थे,
कड़वे घूँट को पीते पीते एक दम से ही चीखे थे,
नींद में उठकर इस दुनिया में फैले झूट को ओड लिया,
और हर सच को बार-बार झुटलाने की कोशिश की,
ख़्वाबों को सिरहाने रखकर सो जाने की कोशिश की!!
रोज़ हंसी, तो रोज़ ख़ुशी जब रोज़ सवेरे उगते थे,
गम के तिनके चोंच में लेकर, थोडा थोडा चुगते थे,
क़ैद थे तब हम ख्वाहिशों के एक अन्जान से पिंजरे में,
जिसको तोड़ ताड़ के हमने उड़ जाने की कोशिश की,
ख़्वाबों को सिरहाने रखकर सो जाने की कोशिश की!!
1 comment:
Wakai Achchi Koshish kee hai janab ne!
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