
गम नहीं है कम है लेकिन ज़िन्दगी का कारवाँ,
कोई जाने या न जाने थम गया है आसमान,
इस हवा के रास्ते में जो भी कोई आएगा,
चल नहीं पायेगा कितना भी हो रास्ता मेहरबान?
आज की बातें अधूरें खवाब जैसी लगती हैं,
दूर ख़ामोशी की बस एक लहर ही धीकती है,
वक़्त जाने कौन सा ये दाव आज चल गया,
साये गुमसुम से पड़े हैं, आँसुओं का है धुंआ!!
-"गम नहीं है कम है लेकिन ज़िन्दगी का कारवाँ,
कोई जाने या न जाने थम गया है आसमान"
चाहतों को आज किस की लग गयी है ये नज़र,
सोचती है धड़कने, इस मोड़ पर रुक जाएँ अगर,
कुछ न होगा दिल में बस एक ज़ख्म सा बन जाएगा,
आरज़ू रोएगी लेकिन खामोश होगी ये जुबां!!!
-“गम नहीं है कम है लेकिन ज़िन्दगी का कारवाँ,
कोई जाने या न जाने थम गया है आसमान"
3 comments:
kya sooch hai... wha wha.......maza aagaya
thanks
Seems Like Your word selection was quite from the very beginning :) :)
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