Monday, June 9, 2008

सोचता हूँ,

सोचता हूँ, कुछ बूँद उधार मांग लूं तुम्हारी पलकों से,
मेरी आँखों में तो अब बचा नहीं पानी!!
किसी भी मोड़ से अब लौट कर आती नहीं राहें,
सूनी सूनी, राह पे चलती एक मंजिल अनजानी!

·कुछ शब्दों को समेट कर अपना दिल का हाल लिख डाला,
बेचारे पन्नो पे लिख दी बिखरी बिखरी कहानी!


·ख़ामोशी का आलम ऐसा मदहोशी सा छाया है,
कोरी कोरी तनहाइयों में यादें नयी पुरानी!

·खवाब हैं ऐसे बिखरे बिखरे, बिगड़ कर नहीं संवरते,
पेशानी पे दिखती सिलवटें, बस हैरानी हैरानी!

·वक़्त ने मेरे वक़्त की काली परत पर चांदी रख दी,
जाने किस खाई में जा गिरी, वो खुशरंग जवानी!

2 comments:

Sonia Pratap Singh said...

yeh kiske liye likhi hai tune...ek baat bolu ab tera dard shabdo mai dikhne luga hai mujhko.

Lost some where in d!s world said...

Aapka shabd chayan kamaaal ka hai :)