
एक चेहरा कहीं पर है जो मुस्कुरा रहा है,
मेरी पलकों पे वो शबनम गिरा रहा है
मैं हूँ परेशान की, यह क्या उलझन है,
यह किसका नूर है, जो आँखों पे छा रहा है?
आवाज़ देके, मैं उसे करीब लाना चाहता हूँ,
जो गुज़रे वक्त की तरह गुज़रता जा रहा है
एक चेहरा कहीं पर है जो मुस्कुरा रहा है,
मेरी पलकों पे वो शबनम गिरा रहा है
जो गुज़रे वक्त की तरह गुज़रता जा रहा है
एक चेहरा कहीं पर है जो मुस्कुरा रहा है,
मेरी पलकों पे वो शबनम गिरा रहा है
हक़ीकत सी निग़ाह बन गई है मेरी,
एक के बाद एक सच नज़र आ रहा है!
एक चेहरा कहीं पर है जो मुस्कुरा रहा है,
मेरी पलकों पे वो शबनम गिरा रहा है
एक के बाद एक सच नज़र आ रहा है!
एक चेहरा कहीं पर है जो मुस्कुरा रहा है,
मेरी पलकों पे वो शबनम गिरा रहा है
तुझे छूने की कोशिश फिर से करता हूँ,
यही एक आरज़ू, दिल कब से दोहरा रहा है!
एक चेहरा कहीं पर है जो मुस्कुरा रहा है,
मेरी पलकों पे वो शबनम गिरा रहा है
2 comments:
yaar kya baat hai tu to kya khoob likta ha.......... am realy tuched with ur poems really good.........
Simple, Heavy & Definitely Touchy!... Behatareen hai Janaab!
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