Monday, June 9, 2008

रौशनी,.....

रौशनी भी अजीब रंग की है,
कभी गम है, तो कभी ज़िन्दगी है,
हमसफ़र की तलाश किस को नही, ढूँढती
है नज़र जिसको वो आशिकी है..

· मैं हूँ उस हसीन दिल का अफसाना,
जिसकी दिल्लगी दिल की लगी है..
रौशनी भी अजीब रंग की है,
कभी गम है, तो कभी ज़िन्दगी है,

· नजारों झूमते हो, एक बात तो सुन लो,
हमारे आंसुओ में भी नमी है,
रौशनी भी अजीब रंग की है,
कभी गम है, तो कभी ज़िन्दगी है,

· ये कागज़ ख़त्म हो ऐसा तो नही लगता,
कलम है हाथ में और शायरी है
रौशनी भी अजीब रंग की है,
कभी गम है, तो कभी ज़िन्दगी है!!

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