निकलो तुम चाँद की मांद से,
देखो सूरज की तपिश यहाँ,
गुज़रती है हर एक छाँव से,
निकलो तुम चाँद की मांद से,
सरपट चलती राहें आवारा,
सूख गई अब नदी की धारा,
हम उम्मीद लगाये हैं नांव से ,
देखो सूरज की तपिश यहाँ,
गुज़रती है हर एक छाँव से,
निकलो तुम चाँद की मांद से,
बैचैनी सी एक उबल रही है,
खावाहिशों को कैसे निगल रही है,
हैरानगी सी है, हवाओं से,
देखो सूरज की तपिश यहाँ,
गुज़रती है हर एक छाँव से,
निकलो तुम चाँद की मांद से,
4 comments:
अच्छा लिखते है आपकी भावनाओ का स्वागत है।
Waah...ati sundar kya baat kahi aapne...acchhi prastuti. badhai sweekarein!!!
ur expressions realy realy worth admiration & pics added to all ur poems made them very classic.i read most of them.congrts
thanks shalini ji... aapko acha laga yahi bahut hai!!
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